टेस्ला रोडस्टर : उड़ती कार का चमत्कार या सड़कों के लिए नई मुसीबत? कार को उड़ते देखना रोमांचक है, लेकिन क्या उड़ने वाली कार वास्तव में हमारे किसी काम की भी है? एलन मस्क ने अपनी नई टेस्ला रोडस्टर से एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया। कार हवा में उछली, पलटी खाई और वापस अपने पहियों पर उतर आई। देखकर मुँह से वाह निकलना स्वाभाविक है। तकनीक अद्भुत है। इसे बनाने वाले अभियंताओं की प्रतिभा भी प्रशंसनीय है। लेकिन मेरी समस्या इस कार की तकनीक से नहीं, उसकी व्यावहारिकता से है। क्योंकि किसी चीज़ का चमत्कारिक होना और उसका उपयोगी होना, दो बिल्कुल अलग बातें हैं। पहले उड़ने और हवा में उछलने का अंतर समझिए टेस्ला ने अपनी कार में अत्यधिक दबाव वाली हवा छोड़ने की तकनीक लगाई है, जिससे वह कुछ क्षणों के लिए हवा में उठ सकती है और करतब दिखा सकती है। लेकिन इसे विमान की तरह उड़ना समझ लेना भूल होगी। सवाल यह है कि क्या यह कार दिल्ली के जाम में फँसकर उड़ते हुए अगले चौराहे पर उतर सकती है? क्या यह चलते यातायात में किसी बाधा को सुरक्षित पार कर सकती है? और सबसे बड़ी बात, यदि इसके नीचे कोई मोटरसाइकिल वाला या पैदल यात्री ...
वैसी दिवाली के तो अब बस किस्से ही सुनाए जाते है! ************************************************* दीपावली का सुंदर स्वरूप जो 30+ के लोगों ने जीया है उसे गुलज़ार साहब ने सुंदर शब्दों में पिरोया है,शुभकामनाओं सहित *अब चूने में नील मिलाकर पुताई का जमाना नहीं रहा। चवन्नी, अठन्नी का जमाना भी नहीं रहा। फिर भी गुलजार साहब की लिखी यह कविता बेमिसाल है* ..... हफ्तों पहले से साफ़-सफाई में जुट जाते हैं चूने के कनिस्तर में थोड़ी नील मिलाते हैं अलमारी खिसका खोयी चीज़ वापस पाते हैं दोछत्ती का कबाड़ बेच कुछ पैसे कमाते हैं *चलो इस बार दीपावली घर पे मनाते हैं ....* दौड़-भाग के घर का हर सामान लाते हैं चवन्नी -अठन्नी पटाखों के लिए बचाते हैं सजी बाज़ार की रौनक देखने जाते हैं सिर्फ दाम पूछने के लिए चीजों को उठाते हैं *चलो इस बार दीपावली घर पे मनाते हैं ....* बिजली की झालर छत से लटकाते हैं कुछ में मास्टर बल्ब भी लगाते हैं टेस्टर लिए पूरे इलेक्ट्रीशियन बन जाते हैं दो-चार बिजली के झटके भी खाते हैं *चलो इस बार दीपावली घर पे मनाते हैं ....* दूर थोक की दुकान से पटाख...